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काव्य संग्रह

विद्यार्थी हूँ....।। मुस्कुराती सी ज़िंदगी और उसमें रंगीन सपनें सपनें भी ... चमत्कारिक भविष्य लिख देने वाले ... विद्यार्थी हूँ... छोटा .. बड़ा मायने रखता हैं बस बड़ा हीं थाम रखा हैं काम .. करेंगे ऐसा नाम कमाएँगे .. कमाएँगे पैसा विद्यार्थी हूँ... बड़ा .. पाना आसान ना था यें सपना तो ... अनेको का था अब सपना धूमिल दिखता हैं घर से निकला.. हूँ...प्राण बचाने को परिवार कीं रीढ़ .... बनाने को कैसे हारूँ मैं..... असलियत पहचानूँ मैं छोटा काम भी अपना हैं ... लम्बी छलाँग निश्चित हैं क्योंकि ... चढ़ने कीं पहेली अब अपनी हैं विद्यार्थी हूँ...... समझ गया हूँ .. वो सपना आसान हैं पाना निकलो ....जो ...मिलें वो सीढ़ी अपनी हैं अब तो मंज़िल अपनी हैं ..... विद्यार्थी हूँ... भविष्य खोजनें निकला हूँ... ...... हेमंत कुमार (मित्र) **********

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