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ग़ज़ल

मिरा इश्क़ बेहद पुराना मिला। दिलें हार,दिल को ठिकाना मिला। ज़िन्दगी रहम कर गयी जो,मुझे, अधूरे सफर मे खजाना मिला। अलग खोज करते रहे लोग,पर, फ़िज़ा मे अहम ही निशाना मिला। बिना बात के मौन थीं ग़ज़ल सब, बहर से ग़ज़ल को तराना मिला। खुदा से प्रशन जब किया प्रेम का, कृष्ण का रम्या ही बयाना मिला। कृष्ण कुमार...।।।

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